आज है रंग पंचमी, इन उपायों से दूर करें घर का क्लेश और आर्थिक संकट

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हिंदू पंचांग के अनुसार होली के 4 दिन बाद चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को हर साल रंग पंचमी का त्योहार मनाया जाता है. इस बार रंग पंचमी 2 अप्रैल को मनायी जा रही है. चूंकि होली का त्योहार 29 मार्च सोमवार को था इसलिए रंग पंचमी का त्योहार 2 अप्रैल शुक्रवार को मनाया जा रहा है. इसका कारण ये है कि देशभर के कई हिस्सों में होली का त्योहर पांच दिनों तक खेलने की परंपरा है और इसलिए होली के त्योहार की समाप्ति रंग पंचमी के साथ मानी जाती है.
सृष्टि में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है

महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और राजस्थान समेत कई राज्यों में रंग पंचमी का त्योहार विशेष रूप से मनाया जाता है. रंग पंचमी के दिन लोग सूखे गुलाल के साथ होली खेलते हैं. इस दिन रंग शरीर पर लगाने की बजाए हवा में अबीर और गुलाल  उड़ाने की परंपरा है. इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और राधा की पूजा के साथ सभी देवी देवताओं का आह्वान किया जाता है. परिवार के बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद लिया जाता है और दान भी किया जाता है. माना जाता है कि रंग पंचमी का त्योहार नकारात्मक ऊर्जा को दूर कर सृष्टि में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है.

ऐसी मान्यता है कि रंग पंचमी के दिन अगर कुछ विशेष उपाय किए जाएं तो जीवन के कई संकटों से छुटकारा मिल सकता है:

1. अगर आप चाहते हैं कि आपके और परिवार वालों के जीवन में आर्थिक संपन्नता बनी रहे और सुख-साधनों की कमी ना हो तो रंग पंचमी के दिन दक्षिणावर्ती शंख में थोड़ा-सा गंगाजल लेकर देवी लक्ष्मी को अर्पित करें. दक्षिणावर्ती शंख मां लक्ष्मी का ही स्वरूप है इसलिए इस शंख की मदद से शुभ फल की प्राप्ति हो सकती है.

2. घर में परिवार के सदस्यों के बीच आए दिन बेवजह क्लेश होता हो तो रंग पंचमी के दिन तांबे के लोटे में जल लें जिसमें थोड़ा सा गंगाजल और गुड़ मिलाएं और इसे सूर्य को अर्पित करें. यही जल पीपल के पेड़ की जड़ में भी डालें और थोड़ा सा पानी बचाकर पूरे घर में इसका छिड़काव करें. ऐसा करने से घर का क्लेश दूर हो जाएगा.

3. कड़ी मेहनत करने के बाद भी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा हो तो कमल के फूल पर बैठी लक्ष्मी जी का चित्र घर की उत्तर दिशा में रखें. उसके आगे घी का दीपक जलाएं और लाल गुलाब का फूल लक्ष्मी जी के साथ ही विष्णु भगवान को भी अर्पित करें. साथ ही गुड़ और मिश्री का भोग लगाएं.

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