अगर आप भी हैं एक पिता तो जाने ब्रेस्टफीडिंग के दौरान पार्टनर के साथ रहना क्यों है जरूरी, विशेषज्ञों ने बताई खास वजह

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मातृत्व सुख के एहसास को काफी खूबसूरत बताया जाता है, लेकिन सार्वजनिक रूप से स्तनपान कराने में महिलाएं शर्मिंदगी महसूस करती हैं। कुछ महिलाएं घर में मौजूद अन्य सदस्यों के होने पर स्तनपान कराने के लिए एक कोना पकड़ लेती हैं। वहीं इस मामले में विशेषज्ञों का कहना कि शिशु को स्तनपान कराने के लिए पुरुषों को अपने पार्टनर का साथ देना जरूरी बताया है। शिशु को स्तनपान कराते वक्त पार्टनर के होने से छह हफ्तों में स्तनपान की दर में बड़ा सुधार देखा जा सकता है। साल 2013 के एक ट्रायल में इसमें 6.4 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी।

 

हेल्थलाइन में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटेन के सफोक में रहने वाली रेबेका ने बताया कि शिशु को स्तनपान कराने के शुरुआती दौर से ही उन्हें अपने पार्टनर का साथ नहीं मिला और उन्होंने अगले आठ महीने तक कठिन परिस्थितियों में अपने नवजात का पालन-पोषण किया। उन्होंने कहा ‘मैं काफी अकेला महसूस कर रही थी और मैं इसके बारे में बोल नहीं पाती थी क्योंकि वह इसे लेकर बहुत अलग विचार रखता था।’

 

स्तनपान के इस विषय पर शोध कर रहे ब्राइटन यूनिवर्सिटी के डॉ.निगेल शेरिफ के अनुसार, रेबेका जैसे कई ऐसे मामलें हैं जहां इस तरह की समस्याएं देखने को मिलती हैं। उन्होंने कहा कि आस्ट्रेलिया में हुए ट्रायल में यह बात निकलकर सामने आई थी कि स्तनपान के दौरान पुरुषों के अपने पार्टनर के साथ रहने से स्तनपान की दर छह सप्ताह में में बड़ा अंतर आता है।

 

सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के मुताबिक, अमेरिका में स्तनपान की दर सबसे ज्यादा है। ला लेचे लीग यूएसए काउंसिल की अध्यक्ष टीना कैस्टेलानोस ने बताया कि अस्पताल में प्रसव के दो दिन बाद ही महिलाओं को घर भेज दिया जाता है। अस्पताल में नर्सों की मदद से उन्हें स्तनपान कराने में मदद मिल जाती हैं। ऐसे में जब वे घर जाती हैं तो उन्हें इस तरह का सपोर्ट मिलना मुश्किल हो जाता है।

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