अब Petrol-Diesel का झंझट खत्म, जल्द ही सड़क पर दौड़ेंगी स्वदेशी ईंधन से चलने वाली कारें

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वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) और केपीआईटी टेक्नोलॉजीज ने भारत की स्वदेश में ही विकसित ईंधन से चलने वाली पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल (एचएफसी) प्रोटोटाइप कार का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है। एचएफसी तकनीक विद्युत ऊर्जा उत्पन्न करने के लिए हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच (हवा से) रासायनिक प्रतिक्रियाओं का उपयोग करती है और जीवाश्म ईंधन जैसे पेट्रोल और डीजल के उपयोग को समाप्त करती है।

ईंधन सेल तकनीक केवल पानी छोड़ती है और इस प्रकार अन्य वायु प्रदूषकों के साथ हानिकारक ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी करती है। ईंधन सेल एक निम्न-तापमान पीईएम (प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन) का प्रकार है जो 65-75 डिग्री सेल्सियस पर संचालित होता है, जो वाहनों के लिए उपयुक्त है। एक बयान में कहा गया कि एचएफसी तकनीक को आगे अपनाने और उपयोग करने से, दुनिया को कम वायु प्रदूषण के स्तर के साथ एक स्वच्छ स्थान बनाया जा सकता है।

केपीआईटी के अध्यक्ष रवि पंडित ने बताया कि इस तकनीक का एक महान भविष्य है और इसके स्वदेशी विकास के कारण, पहले से कहीं अधिक व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य होने की उम्मीद है। सीएसआईआर-एनसीएल के निदेशक अश्विनी कुमार नांगिया ने बताया कि देश में बिजली के परिवहन में ईंधन के रूप में हाइड्रोजन आधारित अक्षय ऊर्जा का समय आ गया है। इससे पेट्रोल और डीजल आयात बिल में कमी आएगी, जबकि हाइड्रोजन पानी के साथ गौण उत्पाद के रूप में सबसे स्वच्छ ईंधन है।

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