ज्ञान की दुनिया में आत्मनिर्भर होना आवश्यक: निशंक

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केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा कि आत्मनिर्भर तथा एक भारत-श्रेष्ठ भारत के लिए भाषाएं, अभिव्यक्ति और ज्ञान की दुनिया में भी आत्मनिर्भर होना अत्यंत आवश्यक है। डॉ निशंक ने आज यहाँ पर वीडियो कांफ्रेंस के जरिए वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग के हीरक जयंती समारोह का उद्घाटन किया। आयोग के 60 वर्ष पूरे होने पर उसके द्वारा किये गए कार्यों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग ने अपनी छह दशक लंबी यात्रा में अब तक नौ लाख से अधिक वैज्ञानिक तथा तकनीकी क्षेत्र से संबंधित अंग्रेजी के शब्दों के लिए हिंदी एवं भारतीय भाषाओँ की एक शब्दावली विकसित की है।
इसमें 15 हजार से अधिक विश्वविद्यालय स्तरीय वैज्ञानिक तथा तकनीकी पुस्तकों  एवं बृहत परिभाषित शब्द संग्रह के 21 खंड प्रकाशित किये हैं जो  बेहद प्रशंसनीय कार्य है। इसके अलावा विगत तीन वर्षों में डिजिटल इंडिया मिशन के अंतर्गत आयोग ने सभी प्रकाशनों को ऑनलाइन माध्यम पर उपलब्ध करवाया है।’’
केंद्रीय मंत्री ने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भाषा संबंधित प्रस्तावों के बारे में विस्तार से सभी को अवगत कराते हुए कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में विश्वविद्यालय स्तर पर भाषा की दृष्टि से एक प्रस्ताव है कि भारतीय भाषाओं और तुलनात्मक साहित्य के कार्यक्रम पूरे देश में शुरू किये जाएँगे। उन्होनें कहा कि एक बहुभाषी राष्ट्र की अपेक्षाओं को पूरा करने तथा भारतीय एवं विदेशी भाषाओं में लिखित या मौखिक रूप में उपलब्ध गुणवत्तापूर्ण ज्ञान-सामग्री को सुलभ कराने की दृष्टि से एक भारतीय अनुवाद एवं निर्वचन संस्थान स्थापित करने का प्रस्ताव भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति में किया गया है।
डॉ निशंक ने आयोग की उपलब्धियों की प्रशंसा करते हुए कहा, ‘‘मुझे खुशी है कि आयोग अपने कर्तव्यों का पालन सही अर्थों में कर रहा हैं और इसकी उपलब्धियों से यह प्रतीत होता है कि जिस उद्देश्य से आयोग की स्थापना हुई थी यह निरंतर उस दिशा में अग्रसर है.। इसके साथ ही अपने हीरक जयंती समारोह के साथ भारतीय भाषाएं, राष्ट्रीय शिक्षा नीति एवं आत्मनिर्भर भारत संभावनाएं एवं चुनौतियां विषय पर दो दिवसीय संवाद की एक स्वस्थ प्रक्रिया भी आरंभ कर रहा है।’’
उन्होंने आगे कहा, ‘‘हमारे आत्मनिर्भर तथा एक भारत-श्रेष्ठ भारत के लिए भाषाएं, अभिव्यक्ति और ज्ञान की दुनिया में भी आत्मनिर्भर होना अत्यंत आवश्यक है। ज्ञान, विज्ञान, प्रौद्योगिकी जैसे विभिन्न धाराओं में शब्दावली का निर्माण, उनका प्रचार-प्रसार तथा आम जनता तक उनकी पहुंच एवं सहज प्रयोग की दिशा में हमें और भी कार्य करने की जरूरत है । इस दिशा में ऐसे वेबिनार्स काफी उपयोगी हो सकते हैं. शिक्षा नीति के आगमन के साथ आयोग का दायित्व और भी मुखर हो जाता है।’’
उन्होंने आयोग के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को हीरक जयंती की बधाई देते हुए कहा कि शिक्षा नीति से लेकर आयोग के कार्यों तक हम सभी भारतीय भाषाओं के सशक्तिकरण हेतु प्रतिबद्ध और समर्पित है। इस अवसर पर प्रोफेसर सच्चिदानंद जोशी, प्रोफेसर योगेन्द्रनाथ शर्मा तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पद्मडॉÞ श्यामंिसह शशि, वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग के अध्यक्ष प्रोफेसर अवनीश कुमार, एवं शिक्षा मंत्रालय, वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग के अधिकारी एवं कर्मचारीगण, शिक्षक इत्यादि भी उपस्थित थे।

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