पाकिस्तान ने सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का किया विरोध

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पाकिस्तान ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का विरोध किया है। भारत विरोधी बयानबाजी का कोई मौका नहीं छोड़ने वाले पाकिस्तान ने भारत की सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की दावेदारी को लेकर अपनी असुरक्षा की भावना व्यक्त की है। संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि मुनीर अकरम ने एक बयान में कहा, ‘‘ प्रधानमंत्री मोदी जटिल अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को लेकर चुुप और वास्तविकता से परे हैं।’’
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 75वें सत्र को संबोधित करते हुए सुरक्षा परिषद में भारत को निर्णायक भूमिका दिए जाने की वकालत करते हुए इसमें सुधार की मांग की थी। मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित करते हुये वैश्विक शांति में भारत की भूमिका को रेखांकित किया और सवाल किया कि संयुक्त राष्ट्र के संस्थापक देशों में से एक होने के बावजूद वैश्विक संस्था की निर्णय प्रक्रिया से उसे कब तक अलग रखा जायेगा। उन्होंने कहा , ‘‘संयुक्त राष्ट्र की प्रतिक्रियाओं में बदलाव, व्यवस्थाओं में बदलाव, स्वरूप में बदलाव आज समय की मांग है।
भारत में संयुक्त राष्ट्र का जो सम्मान है वह बहुत कम देशों में है। यह भी सच्चाई है कि भारत के लोग संयुक्त राष्ट्र की सुधार प्रक्रियाओं के पूरा होने का लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं। आखिर कब तक भारत को संयुक्त राष्ट्र की निर्णय प्रक्रिया से अलग रखा जायेगा।’’ अगले साल जनवरी से सुरक्षा परिषद् के अस्थायी सदस्य के रूप में भारत की प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुये प्रधानमंत्री ने कहा कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र होने की प्रतिष्ठा और इसके अनुभव को हम विश्व  हित के लिए उपयोग करेंगे।
हमारा मार्ग जनकल्याण से जगकल्याण का  है। भारत  की आवाजÞ हमेशा शांति, सुरक्षा और समृद्धि के लिए उठेगी। भारत की आवाज  मानवता, मानव जाति और मानवीय मूल्यों के दुश्मन-आतंकवाद, अवैध हथियारों की  तस्करी, ड्रग्स, मनी लाउंडरिंग के खिलाफ उठेगी। गौरतलब है कि भारत समेत ब्राजील, जर्मनी और जापान जैसे देश कई वर्षों से सुरक्षा परिषद में सुधार और इसके विस्तार की वकालत करते आ रहे हैं। भारत को इसी वर्ष आयरलैंड, मैक्सिको और नार्वे के साथ सुरक्षा परिषद में अस्थायी सदस्य के रूप में दो वर्ष के कार्यकाल के लिए चुना गया है। भारत का कार्यकाल एक जनवरी 2021 से शुरू होगा।

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