कृषि अध्यादेश के खिलाफ 25 सितम्बर को भारत बंद, किसान संगठनों ने बनाई रणनीति

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कृषि संबंधी तीनों विधेयक संसद से पास हो चुके हैं लेकिन विरोध कम होने का नाम नहीं ले रहा है. देश के किसान इन तीनों कृषि विधेयकों के खिलाफ सड़क पर उतरकर सरकार के खिलाफ हल्ला बोलेंगे. भारतीय किसान यूनियन और अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति ने 25 सितंबर को भारत बंद का ऐलान किया है. कोरोना काल में पहली बार है जब किसान अपनी मांग को लेकर सड़क पर उतरने जा रहा है जबकि अभी तक वर्चुअल विरोध प्रदर्शन कर रहा था.

किसान संगठनों के नेताओं ने एकजुट होकर मोदी सरकार की किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. अखिल भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने बताया कि देशभर के किसान 25 सितंबर को कृषि सुधार विधेयक 2020 के विरोध में धरना प्रदर्शन और चक्का जाम करेंगे. यूपी के किसान अपने-अपने गांव, कस्बे और हाईवे का चक्का जाम करने का काम करेंगे. जबकि हरियाणा में पूरी तरह से बंद रहेगा. उन्होंने कहा कि किसानों का यह विरोध प्रदर्शन सोशल मीडिया पर नहीं बल्कि जमीन पर उतरकर सरकार के खिलाफ हल्ला बोलेंगे.

किसान यूनियन के महासचिव धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि भारतीय किसान यूनियन इस हक की लडाई को मजबूती के साथ लड़ेगी. सरकार यदि हठधर्मिता पर अड़िग है तो हम किसान भी पीछे हटने वाले नहीं हैं. किसान के पेट पर सरकार ने हमला किया है, जिसे हम कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे. इस कानून से कृषि क्षेत्र में कम्पनी राज को सरकार स्थापित कर रही है. किसान यूनियन इसे कभी बर्दाश्त नहीं करेगा. इसीलिए किसान 25 सिंतबर को सड़क पर उतरकर संघर्ष का रास्ता अख्तियार करेगा.

धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के पास बहुमत है और बहुमत का आधार लेकर इन बिलों को पास करा लिया गया, लेकिन जब देश के करोड़ों किसान इन बिलों के विरोध में हैं तो इनको अमल में कैसे लाया जा सकेगा, स्वाभिमान संगठन इन बिलों का विरोध करता है और सरकार को चेतावनी देना चाहते हैं कि न्यूनतम समर्थन मूल्य किसानों का अधिकार है और यह हम लेकर रहेंगे

धर्मेंद्र मलिक ने बताया कि भारतीय किसान यूनियन ने 25 सितंबर के लिए पूरी रेखा तैयार कर ली है. उन्होंने कहा कि किसान हर एक सड़क को जाम करने का काम करेंगे. कोरोना के चलते हम 50 से 100 किसानों को एक समूह बनाकर चक्का जाम करेंगे और इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का भी पालन करेंगे. हालांकि, अगर सरकार हमारी शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन में पुलिस के द्वारा दखल करती है तो फिर किसान भी पीछे नहीं हटेगा.

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के संयोजक वीएम सिंह ने कहा कि देश के किसानों की आजीविका खतरे में हैं, जो मक्का 1760 रुपये कुंतल था, उसे किसान 700 से 800 रुपये में बेच रहा है, जिस गेहूं का भाव 1925 रुपये था, वो किसी भी मंडी में 1500 से ज्यादा नहीं बिका और सरकार किसान के लिए एक देश, एक बाजार की बात कर रही है. सरकार ने पहले भी हम किसानों को एमएसपी के नाम पर धोखा दिया है, किसानों की खेती की लागत में सी-2 देने का वादा किया था, वो भी नहीं दिया गया. अब देश के किसानों को कॉर्पोरेट के हाथों बेचने पर मजबूर करना चाहते हैं, जिसे हम नहीं होने देंगे. 25 सितंबर को भारत बंद करने के साथ किसानों की आवाज को और बुलंद करेंगे.

किसान मजदूर संगठन के आदित्य चौधरी ने कहा कि सरकार ने कोरोना की आड़ में किसानों के पीठ में छुरा घोंपने का काम किया है. कोरोना काल में जो अन्नदाता देश के साथ खड़ा था आज सरकार उसी किसान को गुलाम बनाने जा रही है. इसलिए 25 सितंबर को को भारत बंद के साथ पूरी जनता सड़क पर उतरेगी और सरकार की किसान विरोधी नीतियों का हरहाल में विरोध करेंगे. सरकार ने जो एमएसपी का लॉलीपाप दिखा रही है वो सिर्फ छलावा है. इसमें किसान आने वाला नहीं है और 25 सितंबर को सरकार को किसान अपनी ताकत का एहसास भी करा देंगे.

बता दें कि कृषि हितैषी होने के दावों के बीच मोदी सरकार के खिलाफ 2014 से लेकर अब तक कई बड़े किसान आंदोलन हो चुके हैं. अब कृषि सुधार कानून के बहाने किसान संगठनों और विपक्षी पार्टियों को एक बार फिर से सरकार के खिलाफ लामबंद होने का बहाना मिल गया है. अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति ने 25 सितंबर को भारत बंद बुलाया है. विपक्षी दलों ने इसे खाद पानी देना शुरू कर दिया है.

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