मलमास में कर लें ये 4 काम, हो जायेंगे मालामाल

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हिंदू धर्म में मलमास के महीने भले ही किसी शुभकार्य को करने की मनाही हो, लेकिन धर्म से जुड़े कार्य अधिक से अधिक किए जा सकते हैं। इसलिए मलमास यानी अधिकमास में मनुष्य को दान-पुण्य करने के साथ कुछ अन्य धार्मिक कार्य करने पर बहुत जोर दिया गया है। माना जाता है कि इस मास में किए गए धार्मिक कर्मों का फल दोगुना मिलता है। इस साल मलमाल पर 160 साल बाद शुभ संयोग बन रहा है। मलमास 16 अक्टूबर  को समाप्त होगा और 17 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि प्रारंभ हो जाएगा। अधिकमास के अधिपति स्वामी भगवान विष्णु हैं और इसी कारण इस मास को पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। इसलिए इस मास में आइए जानें कौन से काम जरूर करें जिससे बहुत से पुण्यलाभ मिलेंगे।

 

मलमास में कर लें ये चार काम, हर कार्य हो जाएगा आसान

  1. सत्यनाराण की कथा सुने:  मलमास में भगवान विष्णु की पूजा गुरुवार के दिन तो प्रमुख रूप से विधि-विधान से करें, इसके अतिरिक्त प्रतिदिन भगवान की पूजा करें। माना जाता है सत्यनारायण भगवान की कथा यदि मनुष्य मलमास में सुन ले तो उसके दुर्दिन दूर हो जाते हैं। साथ ही देवी लक्ष्मी का आशीवार्द में मनुष्य को प्राप्त होता है। घर में सुख-समृद्धि लाने का इससे आसान उपाय मलमास में कुछ और नहीं हो सकता।
  2. महामृत्युंजय मंत्र का जाप: मलमास में विपदाओं और संकटों से मुक्ति के लिए हर दिन महामृत्युंजय मंत्र का जाप जरूर करना चाहिए। यह वह मंत्र है जो इंसान को अकाल मृत्यु से भी बचाता है। इसलिए मलमास में इस मंत्र का जाप कर आप हर तरह के दोष से मुक्त हो सकते हैं। कोशिश करें कि इस मंत्र का जाप आप रोज शाम के समय करें और प्रतिदिन एक ही समय पर करें। इस मंत्र के जाप से घर की नकारात्मकता दूर होती है।
  3. यज्ञ और अनुष्ठान:  मलमास में किसी भी तरह के शुभ कार्य करने की मनाही है, लेकिन आप घर में धार्मिक अनुष्ठान कर सकते हैं। माना जाता है कि इस पूरे महीने आप जितना भी धार्मिक कार्य करते हैं उसका पूरा पुण्य लाभ प्राप्त होता। इसलिए मलमास में यज्ञ, अनुष्ठान, कथा या भजन-कीर्तन जरूर करना चाहिए। ऐसा करने से मनुष्य की सभी मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं और जगत कल्याण भी होता है।
  4. ब्रज भूमि की यात्रा: मलमास में भगवान विष्णु के सभी अवतारों की पूजा का विधान है। विशेषकर भगवान कृष्ण की पूजा इस मास में जरूर करनी चाहिए। मलमास में ब्रजधाम जाता बहुत ही उत्तम तीर्थ माना गया है। यदि ब्रजधाम आप न जा पाएं तो मन में उन्हें स्मरण करते हुए रोज उनकी पूजा करें और भजन-कीर्तन करें।ऐसा करने से मनुष्य के इस जन्म के ही नहीं पिछले जन्म के पाप भी कटते हैं और मनुष्य को बैकुंठ की प्राप्ति होती है।

तो मलमास में आप प्रतिदिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ दान-पुण्य करें और अपने जीवन के हर कष्ट से मुक्ति पाएं।

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