सचिन तेंदुलकर ने आर्थिक रूप से कमजोर 560 बच्चों के भरण पोषण का जिम्मा लिया

0
303

टीम इंडिया के पूर्व महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर को ‘क्रिकेट का भगवान’ कहा जाता है. यह लाजिमी भी है, क्योंकि मास्टर ब्लास्टर ने तेंदुलकर ने क्रिकेट जगत में कई बड़े रिकॉर्ड जो बनाए हैं. लेकिन क्रिकेट से संन्यास के 7 बाद भी तेंदुलकर मैदान के बाहर भी अपनी वही छवि बनाए रखने में कायम हैं. अकसर देखा गया है कि सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) हर किसी जरूरमंद के लिए सबसे आगे खड़े रहते हैं, अब उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर 560 बच्चों के भरण पोषण और शिक्षा का जिम्मा लिया है.

गौरतलब है कि सचिन तेंदुलकर ने एक गैर सरकारी संगठन (NGO) के साथ मिलकर आर्थिक रूप से कमजोर 560 आदिवासी बच्चों की हर सहायता करने संकल्प लिया है. सचिन तेंदुलकर ने एनजीओ परिवार (NGO Parivaar) नामक एक संगठन से हाथ मिलाकर इस नेक काम को कर रहे हैं. इस एनजीओ ने मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के आसपास और दूर के गांवों में सेवा कुटीर निर्माण काम अच्छे स्तर पर किया है.

सचिन तेंदुलकर के इस सराहनीय कदम और संस्था की मदद की वजह से सीहोर जिले के बीलपति, सेवानिया, खापा, जामुनझील और नयापुरा गांव के बच्चों को शिक्षा और पौष्टिक भोजन की व्यवस्था मुहैया कराई जा रही है. इन बच्चों के नाता उस इलाके की मुख्य रूप से बरेला भील और गोंड जनजातियों से, जिन्हें आदिवासी माना जाता है. इस आधार सचिन इन बच्चों के लिए एक मसीहा का काम कर रहे हैं.

दरअसल इंसानियत के तौर पर सचिन तेंदुलकर जो नेक कार्य कर रहे हैं. उसकी खबर उन्होंने किसी को नहीं दी है.  लेकिन जिस एनजीओ परिवार के तहत वह यह उम्दा काम कर रहे हैं, उसने ही सचिन तेंदुलकर की महानता का परिचय कराया है. एनजीओ ने बताया है कि तेंदुलकर का यह शानदार कदम मध्य प्रदेश के उन आदिवासी बच्चों के लिए उनकी चिंता का सबूत है, जो कुपोषण जैसी गंभीर समस्या और अशिक्षा से जूझ रहे हैं.

सचिन तेंदुलकर यूनिसेफ के सद्धभावना दूत के रूप में नियमित रूप से बच्चों के प्रारंभिक विकास जैसे जरूरी विषयों पर अपनी बात रखते रहे हैं. वास्तव में देखा जाए तो सचिन तेंदुलकर ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि आखिर क्यों उन्हें क्रिकेट में भगवान का दर्जा दिया जाता है. क्योंकि मैदान पर अपने रिकॉर्ड और उसके बाहर अपने शानदार व्यक्तित्व के लिए वह विश्व प्रसिद्ध हैं.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here